PANJAB POLITICS: BJP और अकाली गठबंधन की संभावना तेज, लेकिन दोस्ती नहीं आसान
कुल मिलाकर, मोदी-सुखबीर मुलाकात, SAD की चंडीगढ़ बैठक के संकेत, सीट बँटवारे के अंदरूनी विवाद और भाजपा राज्य इकाई की सolo घोषणा—ये सब मिलकर पंजाब की सियासत में अनिश्चितता का माहौल बनाए हुए हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह गठबंधन बनता है या नहीं, यह सीटों के समझौते और जमीनी प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
PANJAB POLITICS: BJP और अकाली गठबंधन की संभावना तेज, लेकिन दोस्ती नहीं

ASHISH SINGH (JOURNALIST)) WITH REPORTER AMAN CHOPRA(PATIYALA)/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM

**पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन की अटकलें तेज, सीट बँटवारे और वोट बैंक को लेकर अंदरूनी मतभेद**

पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं, हालाँकि दोनों पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। 7 अगस्त 2026 को संसद परिसर में SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद ये अटकलें और बढ़ीं। मुलाकात के अगले दिन चंडीगढ़ में सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी के प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक को संबोधित किया। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में यह संकेत दिया गया कि भाजपा के साथ गठबंधन लगभग तय दिशा में है और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को भी कुछ सीटें दी जा सकती हैं।

हालाँकि, अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि सीट बँटवारे को लेकर अभी विवाद बना हुआ है। भाजपा कुछ खास सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी जता रही है, जिस पर SAD के कार्यकर्ता, आला कमान और ग्राउंड लेवल वर्कर्स पूरी तरह सहमत नहीं हैं। दूसरी ओर, पंजाब भाजपा राज्य इकाई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पार्टी सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और फिलहाल किसी गठबंधन की कोई बात नहीं है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों और अंदरूनी आकलन के मुताबिक, अगर यह गठबंधन बनता है तो SAD के पारंपरिक किसान आधार पर असर पड़ने की आशंका है। 2020 के कृषि कानूनों के बाद किसानों के एक बड़े वर्ग में भाजपा के प्रति नाराजगी बनी हुई है। युवा वर्ग की एक बड़ी लॉबी भी भाजपा के कारण असंतुष्ट मानी जाती है। साथ ही, मुस्लिम और ईसाई समुदाय, जिन्हें SAD का मजबूत सहयोगी माना जाता रहा है, के बिछड़ने के आसार भी जताए जा रहे हैं। आकलन यह है कि भाजपा से मिलने वाले संभावित वोट लाभ की तुलना में किसान, युवा और अल्पसंख्यक वोट बैंक का नुकसान अधिक भारी पड़ सकता है।

BSP के शामिल होने की संभावना पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि BSP इस गठबंधन का हिस्सा बन सकती है, लेकिन पंजाब में BSP की सीमित उपस्थिति और भाजपा के साथ उसके राष्ट्रीय स्तर के समीकरणों को देखते हुए यह आसान नहीं दिखता।

कुल मिलाकर, मोदी-सुखबीर मुलाकात, SAD की चंडीगढ़ बैठक के संकेत, सीट बँटवारे के अंदरूनी विवाद और भाजपा राज्य इकाई की सolo घोषणा—ये सब मिलकर पंजाब की सियासत में अनिश्चितता का माहौल बनाए हुए हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह गठबंधन बनता है या नहीं, यह सीटों के समझौते और जमीनी प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।