EXCLUSIVE STORY: हर रोज पूरे कपड़े उतारते थे, प्राइवेट पार्ट्स में टॉर्च से हुई जांच', 37 साल की एक्ट्रेस की खौफनाक कहानी,पैसा हो तो जेल में कुछ भी मुमकिन'
मानसिक दबाव ने परेशान कर दिया था'अपने जेल के दिनों को याद करते हुए संदीपा विर्क इमोशनल भी हो गईं। उन्होंने बताया कि वहां लगातार बने रहने वाले मानसिक दबाव और परेशानियों के चलते एक समय ऐसा भी आया, जब उनके मन में खुद की जान लेने का विचार तक आया था। संदीपा की ये आपबीती सामने आने के बाद उनके जेल में बिताए समय को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि जेल की व्यवस्था और तलाशी से जुड़े उनके ये दावे उनके व्यक्तिगत अनुभव और पॉडकास्ट में कही गई बातों पर आधारित हैं।
हर रोज पूरे कपड़े उतारते थे, प्राइवेट पार्ट्स में टॉर्च से हुई जांच', 37 साल की एक्ट्रेस की खौफनाक कहानी
अर्चना सिंह /JOURNALIST/DAILY INDIATIMES

Sandeepa Virk: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्ट्रेस संदीपा विर्क ने अपनी जिंदगी के उस दौर को याद किया है, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। 6 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदीपा विर्क को दिल्ली की तिहाड़ जेल में करीब साढ़े चार महीने बिताने पड़े थे। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने जेल में गुजारे अपने दिनों के बारे में कई चौंकाने वाले दावे किए।

जेल में तलाशी को लेकर संदीपा विर्क ने किया बड़ा दावा
संदीपा विर्क ने पॉडकास्ट में जेल की कथित बदइंतजामी, तलाशी के दौरान होने वाली परेशानी और मानसिक दबाव को लेकर खुलकर बात की। संदीपा विर्क ने दावा किया कि जेल में कैदियों की तलाशी का तरीका बेहद असहज और अपमानजनक होता है। उनके मुताबिक जेल पहुंचने के बाद स्टाफ कपड़े उतरवाकर शरीर की जांच करते थे और प्राइवेट पार्ट्स तक टॉर्च की रोशनी डालकर तलाशी ली जाती थी।

बार-बार कपड़े उतरवाकर तलाशी ली जाती थी'
संदीपा विर्क ने बताया कि कई बार उनकी मर्जी के बिना कपड़े उतरवाकर तलाशी ली जाती थी। सर्दियों के मौसम में भी इस प्रक्रिया के दौरान कैदियों को काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता था। संदीपा ने सवाल उठाया कि जब कैदियों की इतनी सख्ती से जांच की जाती है, तो जेल के अंदर मोबाइल फोन और ड्रग्स जैसी प्रतिबंधित चीजें आखिर कैसे पहुंचती हैं।

पैसा हो तो जेल में कुछ भी मुमकिन'
संदीपा विर्क ने जेल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी के पास पैसा है, तो जेल के अंदर भी बहुत कुछ संभव हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह से कैदियों की नियमित जांच की जाती थी, उसके बावजूद जेल में प्रतिबंधित सामान मिलने की खबरें सामने आती रहती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दिन में दो से तीन बार तक स्ट्रिप सर्च (पूरे कपड़े उतारकर होने वाली जांच) की जाती थी। इस तरह की बार-बार होने वाली तलाशी उनके लिए बेहद परेशान करने वाली थी। बार-बार ऐसी स्थिति से गुजरने के दौरान उन्हें काफी असहज महसूस होता था।

जेल के खाने और टॉयलेट पर भी उठाए सवाल
संदीपा विर्क ने जेल के अंदर साफ-सफाई और खाने की व्यवस्था को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि वहां खाना और टॉयलेट बेहद गंदे हुआ करते थे। जेल में पहुंचने के पहले ही दिन उन्हें करीब 25-26 दूसरे लोगों के साथ एक कमरे में रखा गया था। संदीपा के मुताबिक अचानक ऐसी जगह और परिस्थितियों में पहुंचना उनके लिए बेहद मुश्किल अनुभव था। जेल में रहने के दौरान लगातार मानसिक तनाव और दबाव ने उनकी स्थिति को और कठिन बना दिया था।

मानसिक दबाव ने परेशान कर दिया था'
अपने जेल के दिनों को याद करते हुए संदीपा विर्क इमोशनल भी हो गईं। उन्होंने बताया कि वहां लगातार बने रहने वाले मानसिक दबाव और परेशानियों के चलते एक समय ऐसा भी आया, जब उनके मन में खुद की जान लेने का विचार तक आया था। संदीपा की ये आपबीती सामने आने के बाद उनके जेल में बिताए समय को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि जेल की व्यवस्था और तलाशी से जुड़े उनके ये दावे उनके व्यक्तिगत अनुभव और पॉडकास्ट में कही गई बातों पर आधारित हैं।