भारतीयों के जीवन से जुड़ी खबर: सिविक सेंस की कमी, भारत बनता जा रहा कचरे का देश', गंदगी पर भड़के लेफ्टिनेंट जनरल, धर्म गुरुओं से भी पूछा सवाल
खिड़की से कचरा फेंकने का चलनरिटायर्ड सैन्यकर्मी ने कहा कि स्वच्छ भारत तब तक सिर्फ नारों तक ही सीमित रहेगा जब तक लोग सच में इसमें शामिल नहीं होते। और फिर अमीर लोग अपनी 'खास हैसियत' दिखाते हुए गाड़ी की खिड़की से कचरा फेंकने का चलन शुरू कर देते हैं। बाकी लोग बस उसी की नकल करते हैं। कोई भी धार्मिक नेता या राजनेता इस जिम्मेदारी के बारे में बात नहीं करता। आखिर कौन करेगा? भारत तेजी से कचरे का देश बनता जा रहा है।
सिविक सेंस की कमी, भारत बनता जा रहा कचरे का देश', गंदगी पर भड़के लेफ्टिनेंट जनरल, धर्म गुरुओं से भी पूछा सवालभारतीय सेना के लेफ्टिनंट जनरल (रिटायर्ड) भारत के लोगों के सिविक सेंस पर भड़ गए गहैं। उन्होंने कहा कि भारत में जहां-जहां सड़कों पर छोटी-छोटी दुकानें लगती हैं, वहां कचरा ज्यादा होता है।
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नई दिल्ली: भारत में कचरे के निस्तारण को लेकर सिविक सेंस की भारी कमी है। इसलिए देश के ज्यादातर शहरों की सड़कें कचरे से पटी नजर आती हैं। ऐसे में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीपी पांडेय ने गंदगी फैलाने वालों पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने धर्मगुरुओं से भी सवाल पूछा है।
ज्यादा पैदा हो रहा है कचरा
लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने कहा कि सड़कों पर कचरा। जैसे-जैसे भारतीय गरीबी से निकलकर मध्यम आय वर्ग में आ रहे हैं, वे यात्रा कर रहे हैं, घूम-फिर रहे हैं और बाहर खाना-पीना कर रहे हैं। सड़कों पर छोटे-छोटे वेंडर्स के काम शुरू करने से सबसे ज्यादा कचरा पैदा होता है।

ऐसी लड़ाई जिसे जीत नहीं पाते
रिटायर्ड सैन्यकर्मी ने आगे कहा कि बढ़ती आबादी और सिविक सेंस की कमी के कारण, न सिर्फ शहरों की सड़कों पर बल्कि छोटे-छोटे गांवों में भी कचरे का ढेर जमा हो रहा है। सरकारी सफाई कर्मचारी सुबह-सुबह सड़कों की सफाई और कचरा हटाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे वे जीत नहीं पाते।
खिड़की से कचरा फेंकने का चलन
रिटायर्ड सैन्यकर्मी ने कहा कि स्वच्छ भारत तब तक सिर्फ नारों तक ही सीमित रहेगा जब तक लोग सच में इसमें शामिल नहीं होते। और फिर अमीर लोग अपनी 'खास हैसियत' दिखाते हुए गाड़ी की खिड़की से कचरा फेंकने का चलन शुरू कर देते हैं। बाकी लोग बस उसी की नकल करते हैं। कोई भी धार्मिक नेता या राजनेता इस जिम्मेदारी के बारे में बात नहीं करता। आखिर कौन करेगा? भारत तेजी से कचरे का देश बनता जा रहा है।