पटियाला से बड़ी खबर: 253 मास्टर् कैडर अध्यापकों का आंदोलन, शो कॉज नोटिस पर विवाद, कटघरे में सरकार !

A.S. BHOLA/JOURNALIST/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM/PATIYALANEWS/25082026
पटियाला से बड़ी खबर: 253 मास्टर् कैडर अध्यापकों का आंदोलन, शो कॉज नोटिस पर विवाद, कटघरे में सरकार !
पटियाला NEWS
पटियाला में सोमवार को 4161 मास्टर कैडर भर्ती से जुड़े लगभग 253 अध्यापकों और उनके समर्थक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया। अध्यापकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने बिना किसी व्यक्तिगत गलती के तीन साल की सेवा के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने संबंधी शो-कॉज नोटिस जारी कर दिए हैं। वे इन नोटिसों को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
मुख्य कारण
अगस्त 2022 में 4161 मास्टर कैडर पदों की परीक्षा हुई। दिसंबर 2022 में परिणाम आया, जो गलत आंसर की पर आधारित था। शिक्षा विभाग ने जनवरी 2023 में उसी गलत सूची के अनुसार ऑफर लेटर बांट दिए। योग्य उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत के निर्देश पर विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों की कमेटी ने आंसर की की समीक्षा की। नई चयन सूची बनी और लगभग 250 अध्यापकों को 9 मई 2023 को जॉइनिंग दी गई। पहली गलत सूची रद्द कर दी गई।
अब तीन साल बाद विभाग ने इन अध्यापकों को टर्मिनेशन संबंधी शो-कॉज नोटिस भेजे हैं। अध्यापकों का कहना है कि विभाग LPA 727/2023 का हवाला दे रहा है, जबकि उसमें कहीं भी यह नहीं लिखा कि वर्तमान में काम कर रहे अध्यापकों को बाहर किया जाए।
अध्यापकों का पक्ष
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे नई सही सूची के अनुसार जॉइन हुए थे और तीन साल तक निर्दोष सेवा दी है। कई अध्यापकों ने पिछली नौकरियां छोड़ीं या आयु सीमा पार कर चुके हैं। अधिकांश मालवा क्षेत्र से हैं और करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। उनका आरोप है कि विभागीय गलती की सजा उन्हें दी जा रही है। यूनियनों ने मुख्यमंत्री को मेमोरेंडम सौंपकर मांग की है कि नोटिस तुरंत रद्द किए जाएं, अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विभाग का पक्ष
शिक्षा विभाग का रुख है कि हाईकोर्ट की कार्यवाही और आंसर की में बदलाव के बाद मेरिट सूची कई बार संशोधित हुई। कुछ अध्यापक संशोधित कट-ऑफ से नीचे आ गए। विभाग का तर्क है कि अदालती आदेशों और अंतिम मेरिट की शुद्धता बनाए रखने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी करना जरूरी था। नोटिस में 21 दिन का समय जवाब देने के लिए दिया गया है।
आज का घटनाक्रम
पटियाला में अध्यापकों ने धरना लगाकर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और विभाग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि कई पैनल मीटिंग्स रखी गईं लेकिन एक दिन पहले रद्द कर दी गईं। साढ़े तीन महीने बीत जाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन राज्यव्यापी रूप लेगा।
मामला अभी भी विवादास्पद है। अध्यापक न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि विभाग कानूनी प्रक्रिया का हवाला दे रहा है। दोनों पक्षों के तर्क अदालत और सरकार के स्तर पर ही अंतिम रूप ले सकते हैं।