BIG NEWS OF INDIAN: Gold Reserves: क्या दुनिया का सोना जब्त करने वाले हैं ट्रंप, यूरोप में मची अफरा-तफरी, भारत का विदेश में कितना जमा है गोल्ड?
भारत का सोना नीदरलैंड्स के उलट दिशा में जा रहा है। भारत के ताजा सरकारी आंकड़े एक अलग पैटर्न दिखाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक RBI के पास 880.52 टन सोना था।

Gold Reserves: क्या दुनिया का सोना जब्त करने वाले हैं ट्रंप, यूरोप में मची अफरा-तफरी, भारत का विदेश में कितना जमा है गोल्ड?कई दशकों से अमेरिका का न्यूयॉर्क दुनिया के कई देशों के लिए गोल्ड रिजर्व का ठिकाना बना हुआ था। मगर, जर्मनी, फ्रांस और अब नीदरलैंड्स ने अमेरिका में रखा अपना काफी सारा गोल्ड रिजर्व निकाल लिया है। भारत भी कई देशों में अपने गोल्ड का कुछ हिस्सा रिजर्व रखता है। ऐसे में इस गोल्ड रिजर्व को लेकर चिंता बढ़ गई है।
VIJAY KUMAR/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में सोना सांसत में है। दरअसल, यह अपना नया पता-ठिकाना खोज रहा है। बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और हालातों के बीच हाल ही में यूरोपीय देश नीदरलैंड्स ने अपने रिजर्व का लगभग 86 टन सोना अमेरिका और कनाडा से निकालकर लंदन पहुंचा दिया है। इससे पहले इसी साल फ्रांस ने भी न्यूयॉर्क से यूरोप में 129 टन सोना भेजा है।

, भारत की बात करें तो ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि उसका लगभग 77 फीसदी सोना अब देश के भीतर ही रखा है। बड़ा सवाल ये है कि यूरोप में अमेरिका से सोना निकालने की भगदड़ क्यों मची है। क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में रखे दुनिया के गोल्ड रिजर्व पर कब्जा कर सकते हैं। एक्सपर्ट और रिपोर्टों से इसे समझते हैं।
नीदरलैंड्स ने अमेरिका से वापस सोना लाने के पीछे क्या दिए तक
यूरोप के सेंट्रल बैंक अपने सोने के भंडार को उत्तरी अमेरिका से हटाकर अपने देश के करीब ला रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जियोपॉलिटिकल तनाव, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के कारण सरकारें अपनी सबसे महत्वपूर्ण रिजर्व एसेट्स में से एक पर अपना नियंत्रण मज़बूत करना चाहती हैं।
"डच अधिकारियों ने कहा कि इस बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में सोना आसानी से उपलब्ध हो सके। नीदरलैंड के पास रिजर्व में लगभग 313 टन सोना
यह ट्रांसफर देश की मजबूती और तैयारी को बेहतर बनाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। अधिकारियों को सामान्य परिस्थितियों में इन रिजर्व का इस्तेमाल होने की उम्मीद नहीं है।"ओलाफ स्लेइपेन, डच सेंट्रल बैंक के गवर्नर
यूरोप में अमेरिका से सोना लाने की क्यों मची भगदड़
डच फैसला यूरोप में चल रहे एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। फ्रांस ने अमेरिका से अपना काफी सोना वापस मंगा लिया है, जबकि जर्मनी ने पहले ही अपनी रिजर्व मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी के तहत न्यूयॉर्क और पेरिस में रखे 216 टन से ज्यादा सोने को वापस जर्मनी मंगा लिया था।
इटली पर भी अमेरिका में रखी अपनी संपत्ति पर दोबारा सोचने का दबाव रहा है। याहू फाइनेंस के मुताबिक, इटली के पास लगभग 2,452 टन सोना है और वह इसका 43 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा अमेरिका में रखता है।
भारत का सोना भी लंदन, स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स यानी BIS में समेत कई विदेशी वॉल्ट (सुरक्षित भंडार) में रखा है, जिसमें न्यूयॉर्क भी शामिल है।
जानकारों का कहना है कि इन बदलावों के पीछे जियोपॉलिटिकल अस्थिरता, व्यापार विवाद, महंगाई और ऊंची ब्याज दरें जैसे कई कारण हैं। साथ ही, सोने को ऐसी जगहों पर रखने की जरूरत भी है, जहां बाजार में तनाव के समय उसका तेजी से व्यापार किया जा सके।
सेंट्रल बैंकों ने हर साल खरीदा 1,000 टन सोना
यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब सेंट्रल बैंकों ने सोने की खरीद में तेजी से बढ़ोतरी की है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सेंट्रल बैंकों ने पिछले चार सालों में हर साल औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है। यह पिछले दशक की औसत सालाना खरीद से दोगुना है, जिससे इस साल की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं